हिंगणघाट: रमजान के मुकद्दस महीने में इबादत और सब्र की कई मिसालें देखने को मिलती हैं, लेकिन हिंगणघाट के शासकीय ठेकेदार काजिम वाहिद खान पठाण की ४ वर्षीय सुपुत्री मायरा काजिम पठाण ने इतनी छोटी उम्र में रोजा रखकर सभी को हैरान और प्रेरित कर दिया है।
अल्लाह की रजा के लिए दिखाया जज्बा
रमजान का महीना शुरू होते ही नन्ही मायरा ने अपने परिवार के सामने रोजा रखने की जिद की। उनके पिता काजिम पठाण ने बताया कि जब मायरा ने अल्लाह को राजी करने के लिए रोजा रखने की इच्छा जताई, तो परिवार ने भी उसकी मासूमियत और हौसले का पूरा सम्मान किया। शनिवार को तड़के उठकर मायरा ने सुन्नत के मुताबिक सहरी की और पूरे दिन बिना खाए-पिए खुदा की इबादत में मशगूल रही।
फूलों की माला से हुआ स्वागत
शाम को इफ्तार के वक्त जब मायरा का पहला रोजा मुकम्मल हुआ, तो घर में ईद जैसा माहौल नजर आया। परिवार के सदस्यों ने मायरा को फूलों की माला पहनाई और ढेर सारा प्यार व दुआएं दीं। परिजनों का कहना है कि मायरा का यह उत्साह देखकर पूरा घर खुशी से झूम उठा।
"मैने बड़ों से सुना है कि अल्लाह रोजेदार की हर दुआ कुबूल करता है, बस इसी बात ने मुझे रोजा रखने की प्रेरणा दी।"
— मायरा काजिम पठाण
देश की खुशहाली के लिए मांगी दुआ
अपनी तोतली जुबान में मायरा ने बताया कि उसने दिन भर पांचों वक्त की नमाज अदा की। इफ्तार के वक्त नन्ही रोजेदार ने अपने शहरवासियों की सलामती, देश की तरक्की और मुल्क में अमन-चैन व भाईचारे के लिए विशेष दुआ मांगी। ४ साल की बच्ची की यह पहल आज सोशल मीडिया और इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है और अन्य बच्चों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत साबित हो रही है।


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